फिर कैसा घबराना!

कल की तरह आज भी मैं, हम सबके प्यारे मुकेश जी और सुमन कल्याणपुर जी का गाया एक बहुत सुंदर युगल गीत शेयर कर रहा हूँ| जैसा मैंने कल भी कहा था, मुकेश जी ने अनेक बहुत प्यारे गीत लता जी के साथ गाए थे, जो उनको अपना बड़ा भाई मानती थीं, वहीं सुमन कल्याणपुर जी के साथ भी मुकेश जी ने कुछ बहुत प्यारे गीत गए हैं|

आज का यह गीत 1961 में रिलीज हुई फिल्म ‘मॉडर्न गर्ल’ से है, इसका संगीत तैयार किया था रवि जी ने और इस गीत को लिखा था गुलशन बावरा जी ने|

लीजिए प्रस्तुत है यह प्यार भरा रोमांटिक युगल गीत, मुकेश जी और सुमन कल्याणपुर जी के युगल स्वरों में


ये मौसम रंगीन समा,
ठहर ज़रा ओ जान-ए-जां
तेरा मेरा, मेरा तेरा प्यार है,
तो फिर कैसा शरमाना|

रुक तो मैं जाऊं जान-ए-जां,
मुझको है इन्कार कहां
तेरा मेरा, मेरा तेरा प्यार
सनम ना बन जाये अफ़साना|

ये चाँद ये सितारें,
कहते हैं मिल के सारे,
आजा प्यार करें
ये चंदा बैरी देखे,
ऐसे में बोलो कैसे हम इक़रार करें|


दिल में है कुछ,
कुछ कहे जुबां
प्यार यही है जान-ए-जां,
तेरा मेरा, तेरा मेरा प्यार है
तो फिर कैसा घबराना|

ये प्यार की लंबी राहें,
कहती हैं ये निगाहें,
कहीं दूर चलें
बैठे हैं घेरा डाले,
ये ज़ालिम दुनिया वाले,
हमें देख जलें
जलता है तो जले जहां,
ठहर ज़रा ओ जान-ए-जां,
तेरा मेरा, तेरा मेरा प्यार है
तो फिर कैसा घबराना|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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मुझ पे लटें बिखराए!

हम सबके प्यारे मुकेश जी और सुमन कल्याणपुर जी का गाया एक बहुत सुंदर युगल गीत आज शेयर कर रहा हूँ| मुकेश जी ने अनेक बहुत प्यारे गीत लता जी के साथ गए थे, जो उनको अपना बड़ा भाई मानती थीं, वहीं सुमन कल्याणपुर जी के साथ भी मुकेश जी ने कुछ बहुत प्यारे गीत गए हैं|

आज का यह गीत 1968 में रिलीज हुई फिल्म ‘साथी’ से है, इसे राजेन्द्र कुमार जी और वैजयंती माल जी पर फिल्माया गया था, इसका संगीत तैयार किया था नौशाद साहब ने और इस गीत को लिखा था मजरूह सुल्तानपुरी साहब ने|

लीजिए प्रस्तुत है यह प्यार भरा रोमांटिक युगल गीत, मुकेश जी और सुमन कल्याणपुर जी के युगल स्वरों में


मेरा प्यार भी तू है ये बहार भी तू है
तू ही नज़रों में जान-ए-तमन्ना, तू ही नज़ारों में

तू ही तो मेरा नील गगन है
प्यार से रौशन आंख उठाये
और घटा के रूप में तू है
कांधे पे मेरे सर को झुकाये
मुझपे लटें बिखराये
मेरा प्यार …

मंज़िल मेरे दिल की वही है
साया जहाँ दिलदार है तेरा
पर्बत पर्बत तेरी बाहें
गुलशन गुलशन प्यार है तेरा
महके है आँचल मेरा
मेरा प्यार…

जागी नज़र का ख्वाब है जैसे
देख मिलन का दिन ये सुहाना
आँख तो मेरे जलवों में गुम है
देखूँ तुझे या देखूँ ज़माना
बेखुद है दीवाना
मेरा प्यार…

मैं हूँ अकेला कब से मगर तू
आज भी मेरे साथ हो जैसे
याद में तेरी यूँ भी हुआ है
हाथ में तेरा हाथ हो जैसे
भूल सकूँ तो कैसे
मेरा प्यार…

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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