ये दुख ये हैरानी मुझे दे दो!

ये माना मैं किसी क़ाबिल नहीं हूँ इन निगाहों में,
बुरा क्या है अगर ये दुख ये हैरानी मुझे दे दो|

साहिर लुधियानवी

उसकी आँखों में हैरत ज़ियादा थी!

तअज्जुब में तो पड़ता ही रहा है आइना अक्सर,
मगर इस बार उसकी आँखों में हैरत ज़ियादा थी|

राजेश रेड्डी

आँखों को मल के देखते हैं!

तू सामने है तो फिर क्यूँ यक़ीं नहीं आता,
ये बार बार जो आँखों को मल के देखते हैं|

अहमद फ़राज़