आईनों की तरह जड़े हैं पेड़!

अपना चेहरा निहार लें ऋतुएँ,
आईनों की तरह जड़े हैं पेड़|

सूर्यभानु गुप्त

आदमी से बहुत बड़े हैं पेड़!

मौत तक दोस्ती निभाते हैं,
आदमी से बहुत बड़े हैं पेड़|

सूर्यभानु गुप्त

कुछ हैं छोटे तो कुछ बड़े हैं पेड़!

अपनी दुनिया के लोग लगते हैं,
कुछ हैं छोटे तो कुछ बड़े हैं पेड़|

सूर्यभानु गुप्त

परचमों की तरह गड़े हैं पेड़!

जीत कर कौन इस ज़मीं को गया,
परचमों की तरह गड़े हैं पेड़|

सूर्यभानु गुप्त

कौन कहता है ये कड़े हैं पेड़!

कोंपलें फूल पत्तियाँ देखो,
कौन कहता है ये कड़े हैं पेड़|

सूर्यभानु गुप्त

कौन सी बात पर अड़े हैं पेड़!

जिस जगह हैं न टस से मस होंगे,
कौन सी बात पर अड़े हैं पेड़|

सूर्यभानु गुप्त

साल हा साल से खड़े हैं पेड़!

क्या ख़बर इंतिज़ार है किसका,
साल हा साल से खड़े हैं पेड़|

सूर्यभानु गुप्त

हाल पूछा तो रो पड़े हैं पेड़!

बाग़बाँ हो गये लकड़हारे,
हाल पूछा तो रो पड़े हैं पेड़|

सूर्यभानु गुप्त

आँसुओं की तरह झडे हैं पेड़!

कौन आया था किससे बात हुई,
आँसुओं की तरह झडे हैं पेड़|

सूर्यभानु गुप्त

रात तूफ़ान से लड़े हैं पेड़!

उल्टे सीधे गिरे पड़े हैं पेड़,
रात तूफ़ान से लड़े हैं पेड़|

सूर्यभानु गुप्त