हाथ लगा तो निचोड़ दूँगा उसे!

पसीने बाँटता फिरता है हर तरफ़ सूरज,
कभी जो हाथ लगा तो निचोड़ दूँगा उसे|

राहत इंदौरी

पसीने बांटता फिरता है!

पसीने बांटता फिरता है हर तरफ़ सूरज,
कभी जो हाथ लगा तो निचोड़ दूंगा उसे|

राहत इन्दौरी

कॉलर का रंग हूँ!

हर लम्हा ज़िन्दगी के पसीने से तंग हूँ,
मैं भी किसी क़मीज़ के कॉलर का रंग हूँ|

सूर्यभानु गुप्त