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मेरे अपने, मेरे होने की निशानी माँगें!

आज मैं 1991 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘डैडी’ का एक बहुत भावपूर्ण गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| यह गीत लिखा है सूरज सनीम जी ने और इसके लिए संगीत दिया है राजेश रोशन जी ने| इस गीत को ज़नाब तलत अज़ीज़ जी ने बहुत भावपूर्ण तरीके से निभाया है|


इस फिल्म में अनुपम खेर जी ने एक गायक की भूमिका का निर्वाह बड़े प्रभावी ढंग से किया है, जो अपनी शराब की लत के कारण बर्बाद हो जाता है| इस गायक की लाड़ली बेटी की भूमिका पूजा भट्ट ने निभाई थी|


लीजिए प्रस्तुत है यह मार्मिक गीत –

आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत माँगे,
मेरे अपने मेरे होने की निशानी माँगें,
आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत माँगे|


मैं भटकता ही रहा दर्द के वीराने में,
वक्त लिखता रहा चेहरे पे हर-एक पल का हिसाब|
मेरी शोहरत मेरी दीवानगी की नज़्र हुई,
पी गई मय की ये बोतल मेरे गीतों के किताब|


आज लौटा हूँ तो हँसने की अदा भूल गया,
ये शहर भूला मुझे, मैं भी इसे भूल गया|


मेरे अपने मेरे होने की निशानी माँगें,
आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत माँगे|


मेरा फ़न फिर मुझे बाज़ार में ले आया है,
ये वो शै है कि जहाँ मेहर-ओ-वफ़ा बिकते हैं,
बाप बिकते हैं यहाँ लख्त-ए-जिगर बिकते हैं,
कोख बिकती है, दिल बिकते हैं, सर बिकते हैं|
इस बदलती हुई दुनिया का खुदा कोई नहीं
सस्ते दामो में हर रोज खुदा बिकते हैं |
बिकते हैं, बिकते हैं |


मेरे अपने मेरे होने के निशानी माँगें|
आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत माँगे|

हर खरीदार को बाज़ार में बिकता पाया,
हम क्या पाएँगे किसी ने है यहाँ क्या पाया|
मेरे एहसास मेरे फूल कहीं और चलें,
बोल पूजा मेरी बच्ची कहीं और चलें,
और चलें, और चलें|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|


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