आहों का ज़माना है!

आग़ाज़-ए-मोहब्बत है आना है न जाना है,
अश्कों की हुकूमत है आहों का ज़माना है|

जिगर मुरादाबादी

जो अश्क है आँखों में!

ये किसका तसव्वुर है ये किसका फ़साना है,
जो अश्क है आँखों में तस्बीह का दाना है|

जिगर मुरादाबादी

फ़रिश्ते ख़ताएँ करने लगे!

ज़मीं पे आ गए आँखों से टूट कर आँसू,
बुरी ख़बर है फ़रिश्ते ख़ताएँ करने लगे|

राहत इन्दौरी

आँसुओं में लहू छुपा देखा!

ज़ख़्मे-दिल आ गया है आँखों तक,
आँसुओं में लहू छुपा देखा।

नक़्श लायलपुरी

आँखों में शायद थी नमी!

आपकी आँखों में शायद थी नमी,
मेरी आँखों में भी झाँका आपने।

नक़्श लायलपुरी

आँख में कितने चेनाब रखते हैं!

जहान-ए-इश्क़ में सोहनी कहीं दिखाई दे,
हम अपनी आँख में कितने चेनाब रखते हैं|

हसरत जयपुरी

पलकों में मोती से पिरोते हैं!

हम अश्क जुदाई के गिरने ही नहीं देते,
बेचैन सी पलकों में मोती से पिरोते हैं|

हसरत जयपुरी

देखी थी बरसात मुझे होश नहीं!

आँसुओं और शराबों में गुजारी है हयात,
मैंने कब देखी थी बरसात मुझे होश नहीं|

राहत इन्दौरी

बूढ़ों का ये विचार है!

अश्कों में भीगकर जो, मिठाता है और भी,
बूढ़ों का ये विचार है, जामुन का पेड़ है।

सूर्यभानु गुप्त