न समझ सकें तो पानी!

मिरी बे-ज़बान आँखों से गिरे हैं चंद क़तरे,
वो समझ सकें तो आँसू न समझ सकें तो पानी|

नज़ीर बनारसी

आँसुओं की तरह झडे हैं पेड़!

कौन आया था किससे बात हुई,
आँसुओं की तरह झडे हैं पेड़|

सूर्यभानु गुप्त

तब तक गीत सुनाएँगे!

तन्हा तन्हा दुख झेलेंगे महफ़िल महफ़िल गाएँगे,
जब तक आँसू पास रहेंगे तब तक गीत सुनाएँगे|

निदा फ़ाज़ली

मसअला बाहर नहीं जाता!

मोहब्बत के ये आँसू हैं उन्हें आँखों में रहने दो,
शरीफ़ों के घरों का मसअला बाहर नहीं जाता|

वसीम बरेलवी

मोती का गहना आ गया!

तुझको अपना ही लिया आख़िर निगार-ए-इश्क़ ने,
ऐ उरूस-ए-चश्म ले मोती का गहना आ गया|

आनंद नारायण मुल्ला

नए लोग होंगे नई बात होगी!

कहाँ आँसुओं की ये सौग़ात होगी,
नए लोग होंगे नई बात होगी|

बशीर बद्र

भिगोने के बहाने निकल आए!

ऐ रेत के ज़र्रे तिरा एहसान बहुत है,
आँखों को भिगोने के बहाने निकल आए|

मुनव्वर राना

इक समुंदर कह रहा था-

मैंने अपनी ख़ुश्क आँखों से लहू छलका दिया,
इक समुंदर कह रहा था मुझको पानी चाहिए|

राहत इंदौरी

अब रेत से उठाए मुझे!

मैं जिसकी आँख का आँसू था उसने क़द्र न की,
बिखर गया हूँ तो अब रेत से उठाए मुझे|

बशीर बद्र

तूफ़ान हिला भी नहीं सकता!

वैसे तो इक आँसू ही बहाकर मुझे ले जाए,
ऐसे कोई तूफ़ान हिला भी नहीं सकता|

वसीम बरेलवी