रुख़्सत हुआ तब याद आया!

हाल-ए-दिल हम भी सुनाते लेकिन,
जब वो रुख़्सत हुआ तब याद आया|

नासिर काज़मी

अब मुझको कहना आ गया!

पूछता कोई नहीं अब मुझ से मेरा हाल-ए-दिल,
शायद अपना हाल-ए-दिल अब मुझको कहना आ गया|

आनंद नारायण मुल्ला

उसे आज तक ये पता नहीं!

सर-ए-राह कुछ भी कहा नहीं कभी उस के घर मैं गया नहीं,
मैं जनम जनम से उसी का हूँ उसे आज तक ये पता नहीं|

बशीर बद्र