तेरे शहर के लोग!

आज मोहसिन नक़वी जी की लिखी एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| इस ग़ज़ल को जगजीत सिंह जी ने गाया था| कई बार यही खयाल आता है कि श्री जगजीत सिंह जी जैसे लोकप्रिय गायक यदि नहीं होते तो इन महान शायरों की शायरी हम सब तक कैसे पहुँच पाती?

एक प्रसंग याद या रहा है मेरे प्रिय गायक मुकेश जी किसी नगर में शो कर रहे थे, उनसे एक गीत की फरमाइश की गई, मुकेश जी जानते थे कि उस गीत को लिखने वाले शायर उसी शहर में रहते हैं जिनको वहाँ की जनता नहीं जानती थी, मुकेश जी ने उन शायर महोदय को बुलाया और जनता को यह बताते हुए कि यह गीत इनका ही लिखा हुआ है, उसको गाया| इस तरह उन शायर महोदय को उनके शहर के लोगों ने जान लिया|

लीजिए आज प्रस्तुत हैं, जगजीत सिंह जी द्वारा गाई गयी इस ग़ज़ल के बोल:

तुझसे मिलने की सज़ा देंगे तेरे शहर के लोग
ये वफ़ाओं का सिला देंगे तेरे शहर के लोग|

क्या ख़बर थी तेरे मिलने पे क़यामत होगी
मुझको दीवाना बना देंगे तेरे शहर के लोग,
मुझको दीवाना बना देंगे तेरे शहर के लोग
तुझसे मिलने की सज़ा देंगे तेरे शहर के लोग|

तेरी नज़रों से गिराने के लिये जान-ए-हयात
मुझको मुजरिम भी बना देंगे तेरे शहर के लोग,
मुझको मुजरिम बना देंगे तेरे शहर के लोग|
तुझसे मिलने की सज़ा देंगे तेरे शहर के लोग|


कह के दीवाना मुझे मार रहे हैं पत्थर,
कह के दीवाना मुझे मार रहे हैं पत्थर,
और क्या इसके सिवा देंगे तेरे शहर के लोग|
तुझसे मिलने की सज़ा देंगे तेरे शहर के लोग|
ये वफ़ाओं का सिला देंगे तेरे शहर के लोग|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
******