बस्ती में ख़ंजर बोलते हैं!

ज़ुबां ख़ामोश है डर बोलते हैं,
अब इस बस्ती में ख़ंजर बोलते हैं|

राजेश रेड्डी

बाज़ारों की हलचल भेजो न!

बस्ती बस्ती दहशत किसने बो दी है,
गलियों बाज़ारों की हलचल भेजो न|

राहत इन्दौरी

वहां पर क्या हुआ होगा!

ग़ज़ब ये है की अपनी मौत की आहट नहीं सुनते
वो सब के सब परेशां हैं वहां पर क्या हुआ होगा।

दुष्यंत कुमार