आना जाना नहीं कि तुझसे कहें!

अब तो अपना भी उस गली में ‘फ़राज़’,
आना जाना नहीं कि तुझसे कहें|

अहमद फ़राज़

याद बरसती घटा लगे!

गुज़रे दिनों की याद बरसती घटा लगे,
गुज़रूँ जो उस गली से तो ठंडी हवा लगे|

क़तील शिफ़ाई