ठौर-ठिकानों से बनाए रखना!

जाने किस मोड़ पे मिट जाएँ निशाँ मंज़िल के,
राह के ठौर-ठिकानों से बनाए रखना|

हादसे हौसले तोड़ेंगे सही है फिर भी,
चंद जीने के बहानों से बनाए रखना|

बालस्वरूप राही