तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है!

हमारे मुँह से जो निकले वही सदाक़त है,
हमारे मुँह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है|

राहत इन्दौरी

उठते सवालों को क्या करूँ!

मैं जानता हूँ सोचना अब एक जुर्म है,
लेकिन मैं दिल में उठते सवालों को क्या करूँ|

राजेश रेड्डी

मेरे साथ आ उसे भूल जा!

मैं तो गुम था तेरे ही ध्यान में, तेरी आस तेरे गुमान में,
सबा कह गयी मेरे कान में, मेरे साथ आ उसे भूल जा।

अमजद इस्लाम

तू मुझे सोचना छोड़ दे!

खूबसूरत हैं आँखे तेरी, रात को जागना छोड़ दे,
खुद ब खुद नींद आ जायेगी, तू मुझे सोचना छोड़ दे|

हसन काज़मी

रात भर सोचता रहा तुझको!

रात भर सोचता रहा तुझको,
ज़हन-ओ-दिल मेरे रात भर महके|

डॉ. नवाज़ देवबंदी

सोचों में पड़े हुए हैं!

जा पहुँचा मंज़िल पे ज़माना,
हम सोचों में पड़े हुए हैं|

राजेश रेड्डी