अपने-आप को तन्हा किया न जाए!

हम हैं तेरा ख़याल है तेरा जमाल है,
इक पल भी अपने-आप को तन्हा किया न जाए|

जाँ निसार अख़्तर

नदी गुनगुनाई ख़यालात की!

उजालों की परियाँ नहाने लगीं,
नदी गुनगुनाई ख़यालात की|

बशीर बद्र