रोशनी थी वो भी सलामत नहीं रही!

कैसी मशालें ले के चले तीरगी में आप,
जो रोशनी थी वो भी सलामत नहीं रही|

दुष्यंत कुमार

मशालें लगातार बढ़ती गईं!

जब मशालें लगातार बढ़ती गईं,
रौशनी हारकर मुख्तसर हो गई|

रामावतार त्यागी