वो दौलत क्या वो ख़ज़ाना क्या!

उस हुस्न के सच्चे मोती को हम देख सकें पर छू न सकें।
जिसे देख सकें पर छू न सकें वो दौलत क्या वो ख़ज़ाना क्या॥

इब्ने इंशा

हाथ लगा कर देखूं !

मोम के पास कभी आग को लाकर देखूं
सोचता हूँ के तुझे हाथ लगा कर देखूं |

राहत इन्दौरी