तुम भी बहल सको तो चलो!

यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें,
इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो|

निदा फ़ाज़ली

मगर क़ीमत ज़ियादा थी!

मयस्सर मुफ़्त में थे आसमाँ के चाँद तारे तक,
ज़मीं के हर खिलौने की मगर क़ीमत ज़ियादा थी|

राजेश रेड्डी