हादसे जो दिल पे हमारे गुज़र गए!

तस्वीर-ए-ज़िंदगी में नया रंग भर गए,
वो हादसे जो दिल पे हमारे गुज़र गए|

महेश चंद्र नक़्श

रोज़ के सदमात ने रोने न दिया!

एक दो रोज़ का सदमा हो तो रो लें “फ़ाकिर”,
हमको हर रोज़ के सदमात ने रोने न दिया|

सुदर्शन फ़ाकिर

जिस ओर को दुआर है!

रस्ता न भूलिएगा, दुखों के मकान का,
जिस ओर को दुआर है, जामुन का पेड़ है।

सूर्यभानु गुप्त