हादिसा वो मुझसे जोड़ देता है!

मुझे बे-दस्त-ओ-पा कर के भी ख़ौफ़ उसका नहीं जाता,
कहीं भी हादिसा गुज़रे वो मुझसे जोड़ देता है|

वसीम बरेलवी

ऐसा ही ये मंज़र बोलते हैं!

नया इक हादिसा होने को है फिर,
कुछ ऐसा ही ये मंज़र बोलते हैं|

राजेश रेड्डी