परदेस ले जाएगी फिर शायद!

किसी को गाँव से परदेस ले जाएगी फिर शायद,
उड़ाती रेल-गाड़ी ढेर सारा फिर धुआँ आई|

मुनव्वर राना

इक रेल जा रही थी कि!

‘अंजुम’ तुम्हारा शहर जिधर है उसी तरफ़,
इक रेल जा रही थी कि तुम याद आ गए|

अंजुम रहबर