ख़ज़ाना यहीं से निकलेगा!

इसी गली में वो भूखा फ़क़ीर रहता था,
तलाश कीजे ख़ज़ाना यहीं से निकलेगा|

राहत इन्दौरी

ख़ज़ाने निकल आए!

माँ बैठ के तकती थी जहाँ से मिरा रस्ता,
मिट्टी के हटाते ही ख़ज़ाने निकल आए|

मुनव्वर राना

इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती!

दिल में न हो ज़ुरअत तो मोहब्बत नहीं मिलती,
खै‍‌‌रात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती| ‍‌

निदा फ़ाज़ली

मिट्टी के पीछे रतन खो गया!

तन बचाने चले थे कि मन खो गया,
एक मिट्टी के पीछे रतन खो गया|

रामावतार त्यागी