जो गुज़री हमें है याद सब!

तल्ख़ियाँ कैसे न हों अशआ’र में,
हम पे जो गुज़री हमें है याद सब|

जावेद अख़्तर

गर्दिश-ए-पैमाना हम!

मस्ती-ए-रिंदाना हम सैराबी-ए-मय-ख़ाना हम,
गर्दिश-ए-तक़दीर से हैं गर्दिश-ए-पैमाना हम|

अली सरदार जाफ़री

अपने हालात बरतता हूँ!

खुलते भी भला कैसे आँसू मेरे औरों पर,
हँस-हँस के जो मैं अपने हालात बरतता हूँ ।

राजेश रेड्डी

ग़म-ए-हयात से कह दो ख़रीद लाये मुझे!

मैं अपनी ज़ात में नीलाम हो रहा हूँ “क़तील”,
ग़म-ए-हयात से कह दो ख़रीद लाये मुझे।

क़तील शिफ़ाई