रंग होगा न बदन होगा न चेहरा होगा!

आज मैं साहिर होशियारपुरी जी की लिखी एक गज़ल शेयर कर रहा हूँ, जिसे जगजीत सिंह जी और चित्रा सिंह जी ने बड़े खूबसूरत अंदाज़ में गाया था। यह एक छोटी सी लेकिन बहुत प्यारी गज़ल है, इसका पहला शेर ही यह बताता है कि जब समय बदलता है तब बहुत कुछ बदल जाता है। … Read more

%d bloggers like this: