अपने बाप के ऊपर नहीं जाता!

घरों की तर्बियत क्या आ गई टी-वी के हाथों में,
कोई बच्चा अब अपने बाप के ऊपर नहीं जाता|

वसीम बरेलवी

हम पर किया यूँ छुप-छुप कर वार!

टी.वी.ने हम पर किया यूँ छुप-छुप कर वार,
संस्कृति सब घायल हुई बिना तीर-तलवार|

गोपाल दास नीरज

टी०वी० पर भेड़िए!

स्वर्गीय कुबेरदत्त जी किसी ज़माने में मेरे मित्र हुआ करते थे, जब वे बेरोज़गार थे, संघर्ष कर रहे थे, बहुत अच्छे गीत लिखते थे| बाद में वे दूरदर्शन में पदस्थापित हो गए, काफी प्रगति की उन्होंने, दूरदर्शन पर बहुत सुंदर कार्यक्रम भी दिए, साहित्यिक गोष्ठियों आदि के तो वे विशेषज्ञ थे, लेकिन दूरदर्शन में जाने के बाद गीत उनसे छूट गए, बल्कि उन्होंने अन्य अनेक प्रगतिशील साथियों की तरह गीत को ‘पलायन’ कहना शुरू कर दिया| मैं भी दिल्ली से दूर अनेक स्थानों पर पदस्थापित रहा और उनसे संपर्क पूरी तरह टूट गया|

दूरदर्शन में रहते हुए उन्होंने अलग तरह की ‘दृष्टियुक्त’ रचनाएं दीं| लीजिए आज प्रस्तुत है उनकी बाद में लिखी गई एक रचना, जो दूरदर्शन पर हुए उनके अनुभव से संपन्न है-

भेड़िए
आते थे पहले जंगल से
बस्तियों में होता था रक्तस्राव
फिर वे
आते रहे सपनों में
सपने खण्ड-खण्ड होते रहे।

अब वे टी०वी० पर आते हैं
बजाते हैं गिटार
पहनते हैं जीन
गाते-चीख़ते हैं
और अक्सर अँग्रेज़ी बोलते हैं


उन्हें देख
बच्चे सहम जाते हैं
पालतू कुत्ते, बिल्ली, खरगोश हो जाते हैं जड़।

भेड़िए कभी-कभी
भाषण देते हैं
भाषण में होता है नया ग्लोब
भेड़िए ग्लोब से खेलते हैं
भेड़िए रचते हैं ग्लोब पर नये देश
भेड़िए
कई प्राचीन देशों को चबा जाते हैं।
लटकती है
पैट्रोल खदानों की कुँजी
दूसरे हाथ में सूखी रोटी


दर्शक
तय नहीं कर पाते
नमस्ते किसे दें
पैट्रोल को
या रोटी को।
टी०वी० की ख़बरे भी
गढ़ते हैं भेड़िए
पढ़ते हैं उन्हें ख़ुद ही।

रक्तस्राव करती
पिक्चर-ट्यूब में
नहीं है बिजली का करण्ट
दर्शक का लहू है।


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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चक्रवर्ती सम्राट अशोक !

आज बात करूंगा सीरियल ‘चक्रवर्ती सम्राट अशोक’ के बारे में जो वर्ष 2015-16 के दौरान कलर्स चैनल पर दिखाया गया था| इससे पूर्व मैंने ‘देवों के देव महादेव’ देखा था और उसके बारे में एक आलेख लिखा था| ‘देवों के देव महादेव’ सीरियल देखने में हमें लॉक डाउन के प्रारंभ होने से उसके समाप्त होने तक, लगभग 3 माह का समय लग गया था| अब हम वूट्स (voots) पर ‘चक्रवर्ती सम्राट अशोक’ देख रहे हैं, हम प्रतिदिन कम से कम 4-5 एपिसोड देखते हैं और लगता है कि इस वृहद सीरियल को देखने में भी इतना ही लंबा समय लग जाएगा|


अभी तक हमने लगभग 100 एपिसोड देखे हैं, जिनमें बालक अशोक की भूमिका सिद्धार्थ निगम ने निभाई है, चाणक्य की भूमिका में तो मनोज जोशी हैं ही, समीर धर्माधिकारी ने सम्राट बिन्दुसार की भूमिका निभाई है| अब तक जो देखा है, उससे लगता है कि निश्चित रूप से इस सीरियल को देखकर जहां सम्राट अशोक और मौर्य वंश के इतिहास के बारे में काफी जानकारी मिलेगी और काफी मनोरंजन भी होगा| बालक अशोक के कारनामे भी काफी सराहनीय हैं और चाणक्य, जो राजनीति और अर्थशास्त्र के सिद्धांतों के रचयिता हैं, उनके बारे में भी इस सीरियल से उपयोगी जानकारी मिलेगी|


इसमें एक चरित्र राजमाता हेलेना भी है, जो सम्राट चन्द्रगुप्त की विदेशी पत्नी थीं, जिसे सम्राट बिन्दुसार वास्तव में माता जैसा ही सम्मान देते हैं, परंतु उस महिला के मन में प्रतिशोध की ज्वाला धधक रही है, क्योंकि उसका बेटा जस्टिन राजा नहीं बन पाया था| चाणक्य तो जैसा हम सभी जानते हैं मौर्य वंश की प्रतिष्ठा के लिए अपना जीवन खपा देते हैं और जैसा कि अक्सर राज परिवारों के बारे में सुना ही जाता राज भवनों की एक प्रमुख विशेषता होती है- अनेक रानियाँ और निरंतर चलते षडयंत्र!

ऐसे में विदेशी राजमाता- हेलेना की भूमिका में सुजाने बेर्नेट ने भी अपनी खलनायिका वाली भूमिका बड़ी कुशलता से निभाई है, अब इसका मैं क्या करूं कि उनके अभिनय, भाषा और पुत्र मोह को देखकर बरबस श्रीमती सोनिया गांधी की याद आ जाती है| जहां तक हमने देखा है उसमें समूचे मौर्य वंश को राजकुमार जस्टिन के विवाह के लिए बने विशेष ‘लाक्षागृह’ में भस्म करके गुप्त सुरंग से निकाल जाने की हेलेना और उसके साथियों की योजना फेल हो जाती है, हाँ कुछ लोगों की मृत्यु अवश्य होती है, और इस षडयंत्र का दोष राजकुमार जस्टिन, अपनी माँ को बचाने के लिए अपने सिर ले लेते हैं|

अशोक की माँ और बिन्दुसार की चौथी पत्नी- धर्मा, अभी तक राजमहल में सेविका बनकर ही रह रही है और सीरियल में अक्सर यह पता नहीं चलता कि कब किसका, किसके साथ प्रेम चल रहा है और किसके साथ शत्रुता! ऐसा भी लगता है कि यदि आज की तरह वीडियो कैमरे प्रमुख स्थानों पर लगे होते और मोबाइल फोन भी होते तो बहुत सारे षडयंत्र नहीं हो पाते|


खैर ये सीरियल पूरा देख पाने में तो काफी समय लग जाएगा, यही मन में आया कि अभी तक के इस अनुभव को शेयर करते हुए यह बताऊं कि ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित इस सीरियल को देखने का अनुभव काफी अच्छा और उपयोगी होगा, यदि आपके पास इतना धैर्य, रुचि और समय है| आगे चलकर इस सीरियल में सम्राट अशोक की भूमिका भी मोहित रैना निभाएंगे, जिन्होंने ‘देवों के देव महादेव’ में महादेव की भूमिका निभाई थी|

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|


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