इसलिए मैं बड़ा अकेला था!

अपने अंदाज़ का अकेला था,
इसलिए मैं बड़ा अकेला था|

वसीम बरेलवी

भीड़ में भी जाए तो तन्हा दिखाई दे!

क्या हुस्न है जमाल है क्या रंग-रूप है,
वो भीड़ में भी जाए तो तन्हा दिखाई दे|

कृष्ण बिहारी नूर

किसी के बराबर नहीं रहा!

मुझ में ही कुछ कमी थी कि बेहतर मैं उनसे था,
मैं शहर में किसी के बराबर नहीं रहा|

मुनीर नियाज़ी