चिड़ियों को दाने, बच्चों को, गुड़धानी दे मौला!

आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग – इंटरनेट पर ज्ञान देने वाले तो भरे पड़े हैं, पर मैं अज्ञान का ही पक्षधर हूँ। जो व्यक्ति आज भी दिमाग के स्थान पर दिल पर अधिकतम भरोसा करते हैं, उनमें कवि-शायर काफी बड़ी संख्या में आते हैं। वहाँ भी सभी ऐसे हों, ऐसा नहीं … Read more

और फिर मानना पड़ता है, ख़ुदा है मुझ में

आज उर्दू शायरी के एक और सिद्धहस्त हस्ताक्षर स्वर्गीय कृष्ण बिहारी ‘नूर’ जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| नूर साहब भी अपने अलग अंदाज़ के लिए जाने जाते थे| आइए आज इस अलग क़िस्म की ग़ज़ल का आनंद लेते हैं- आग है, पानी है, मिट्टी है, हवा है, मुझ में|और फिर मानना पड़ता … Read more

मकान ख़ाली हुआ है, तो कोई आएगा!

आज उर्दू शायरी में अपनी अलग पहचान बनाने वाले, डॉक्टर बशीर बद्र जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| बशीर बद्र जी शायरी में प्रयोग करने के लिए विख्यात हैं| आज मैं उनकी जो ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ, वह एक रूमानी ग़ज़ल है| हमेशा सीरियस बातें तो ठीक नहीं हैं, इसलिए आज इस … Read more

किस क़दर जल्द बदल जाते हैं इन्सां जाना !

भारतीय उपमहाद्वीप में उर्दू के जो सर्वश्रेष्ठ शायर हुए हैं, उनमें से एक रहे हैं जनाब अहमद फराज़, वैसे तो श्रेष्ठ कवियों/शायरों के लिए सीमाओं का कोई महत्व नहीं होता, लेकिन यह बता दूँ कि फराज़ साहब पाकिस्तान में थे और उनमें इतना साहस था की उन्होंने वहाँ मिलिटरी शासन का विरोध किया था|फराज़ साहब … Read more

तू दबे पाँव कभी आ के चुरा ले मुझको!

आज मैं कतील शिफाई जी की एक गजल शेयर कर रहा हूँ| इस गजल के कुछ शेर जगजीत सिंह जी ने भी गाए हैं| बड़ी सुंदर गजल है, आइए इसका आनंद लेते हैं-   अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको, मैं हूँ तेरा,तू नसीब अपना बना ले मुझको|   मुझसे तू पूछने आया … Read more

तेरा मुजरिम हूँ मुझे डूब के मर जाने दे!

आज ज़नाब नज़ीर बाक़री जी की लिखी हुई एक गज़ल याद आ रही है, जिसे जगजीत सिंह जी ने अपनी मधुर आवाज में गाकर अमर कर दिया।     इस गज़ल को सुनते हुए यही खयाल आता है कि कैसे अजीब प्राणी होते हैं ये कवि-शायर भी, ज़ुर्म भी क़ुबूल करेंगे और सज़ा भी अपनी … Read more

उसी के हाथ का पत्थर मेरी तलाश में है!

आज ज़नाब कृष्ण बिहारी ‘नूर’ जी की एक खूबसूरत सी गज़ल शेयर करने का मन हो रहा है। ‘नूर’ साहब उर्दू अदब के जाने-माने शायर थे, इस गज़ल में कुछ बेहतरीन फीलिंग्स और जीवन का फल्सफा भी है। वैसे इस गज़ल को जगजीत सिंह जी ने गाया भी है, इसलिए कभी तो आपने इसको सुना … Read more

बहुत तलाश किया कोई आदमी ना मिला!

आज डॉ. बशीर बद्र जी की एक गज़ल याद आ रही है, डॉ. बद्र शायरी में एक्सपेरीमेंट करने के लिए जाने जाते हैं, इस गज़ल में भी उन्होंने कुछ बहुत अच्छे शेर कहे हैं। यह भी जीवन की एक सच्चाई है कि बहुत सी बार जब हम ज़िंदगी में जो कुछ तलाश करते हैं, वही  … Read more

%d bloggers like this: