अजीब शर्त है दीदार के लिए!

कैसी अजीब शर्त है दीदार के लिए,
आँखें जो बंद हों तो वो जल्वा दिखाई दे|

कृष्ण बिहारी नूर

वो दौलत क्या वो ख़ज़ाना क्या!

उस हुस्न के सच्चे मोती को हम देख सकें पर छू न सकें।
जिसे देख सकें पर छू न सकें वो दौलत क्या वो ख़ज़ाना क्या॥

इब्ने इंशा