तेरी आवाज़ आ रही है अभी!

याद के बे-निशाँ जज़ीरों से,
तेरी आवाज़ आ रही है अभी|

नासिर काज़मी

आवाज़ होती जा रही है!

ख़मोशी साज़ होती जा रही है,
नज़र आवाज़ होती जा रही है|

आनंद नारायण ‘मुल्ला’