कब हश्र मुअ’य्यन है !

कब तक अभी रह देखें ऐ क़ामत-ए-जानाना,
कब हश्र मुअ’य्यन है तुझको तो ख़बर होगी|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

देखेंगी पलट कर तिरी आँखें!

मैं संग-सिफ़त एक ही रस्ते में खड़ा हूँ,
शायद मुझे देखेंगी पलट कर तिरी आँखें|

मोहसिन नक़वी

हम तुम्हारा रास्ता देखा किए!

रास्ते अपनी नज़र बदला किए,
हम तुम्हारा रास्ता देखा किए|

राही मासूम रज़ा

चाँदनी दिल दुखाती रही रात भर!

आप की याद आती रही रात भर,
चाँदनी दिल दुखाती रही रात भर|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

पड़ोसी के घर आया होगा!

दिल-ए-नादाँ न धड़क ऐ दिल-ए-नादाँ न धड़क,
कोई ख़त ले के पड़ोसी के घर आया होगा|

कैफ़ भोपाली

मिरे साथ जलते जलते!

शब-ए-इंतिज़ार आख़िर कभी होगी मुख़्तसर भी,
ये चराग़ बुझ रहे हैं मिरे साथ जलते जलते|

कैफ़ी आज़मी

रोज़ जीता हुआ रोज़ मरता हुआ!

रोज़ जीता हुआ रोज़ मरता हुआ,
हर नए दिन नया इंतिज़ार आदमी|

निदा फ़ाज़ली

साल हा साल से खड़े हैं पेड़!

क्या ख़बर इंतिज़ार है किसका,
साल हा साल से खड़े हैं पेड़|

सूर्यभानु गुप्त

तलाश में सहर बार बार गुज़री है!

तुम आए हो न शब-ए-इंतिज़ार गुज़री है,
तलाश में है सहर बार बार गुज़री है|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

जा भी चुका है मैं इंतिज़ार में हूँ!

ये कैसा नश्शा है मैं किस अजब ख़ुमार में हूँ,
तू आ के जा भी चुका है मैं इंतिज़ार में हूँ|

मुनीर नियाज़ी