तुम्हारी दीवार गल रही है!

मैं क़त्ल तो हो गया तुम्हारी गली में लेकिन,
मेरे लहू से तुम्हारी दीवार गल रही है|

जावेद अख़्तर

खिड़की निकले कहीं मेहराब लगे!

अभी बे-साया है दीवार कहीं लोच न ख़म,
कोई खिड़की कहीं निकले कहीं मेहराब लगे|

निदा फ़ाज़ली

बुनियाद हिलनी चाहिए!

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,
शर्त थी लेकिन कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए|

दुष्यंत कुमार

कच्ची दीवार हूं 3

बात करने में जो मुश्किल हो तुम्हे महफिल में,
मैं समझ जाऊंगा नज़रों से बताना मुझको।

असरार अंसारी