वक्त!

आज एक बार फिर मैं हिन्दी अत्यंत श्रेष्ठ और सृजनशील कवि एवं नवगीतकार श्री बुदधिनाथ मिश्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ, इस नवगीत में श्री बुदधिनाथ मिश्र जी ने समय की असीम शक्ति का वर्णन किया है|

लीजिए प्रस्तुत है श्री बुदधिनाथ मिश्र जी का यह सुंदर नवगीत –

वक्त कभी माटी का, वक्त कभी सोने का
पर न किसी हालत में यह अपना होने का ।

मिट्टी से बने महल, मिट्टी में मिले महल
खो गई खंडहरों में वैभव की चहल-पहल
बाजबहादुर राजा, रानी वह रूपमती
दोनों को अंक में समेट सो रही धरती

रटते हैं तोते इतिहास की छड़ी से डर
लेकिन यह सबक कभी याद नहीं होने का ।

सागर के तट बनते दम्भ के घरौंदे ये
ज्वार के थपेड़ों से टूट बिखर जाएंगे
टूटेगा नहीं मगर ये सिलसिला विचारों का
लहरों के गीत समय-शंख गुनगुनाएंगे

चलने पर संग चला सिर पर नभ का चंदा
थमने पर ठिठका है पाँव मिरगछौने का ।

बांध लिया शब्दों को मुट्ठी में दुनिया को
द्वार ही न मिला मुक्ति का जिसको मांगे से
सोने की ढाल और रत्न-जड़ी तलवारें
हारती रहीं कुम्हार के कर के धागे से

सीखा यों हमने फ़न सावन की बदली में
सावन के रंग और नूर को पिरोने का ।


(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|

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बस यही एक पल है!


आज मैं 1965 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘वक़्त’ का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| फिल्मी गीतों में सभी प्रकार के दर्शन, हर प्रकार के विचारों, फलसफ़ों को अभिव्यक्ति दी जाती है, जैसे जो पार्टी एनिमल कहे जाते हैं, विलन और वेंप होते हैं, उनका अलग फलसफ़ा होता है| ऐसा ही फलसफ़ा इस गीत में व्यक्त किया गया है|

आज का यह गीत साहिर लुधियानवी जी का लिखा हुआ है और इसे रवि जी के संगीत निर्देशन में आशा भोंसले जी और समूह ने गाया था| लीजिए प्रस्तुत हैं इस गीत के बोल –

आगे भी जाने ना तू, पीछे भी जाने ना तू
जो भी है बस यही एक पल है|

अनजाने सायों का राहों में डेरा है
अनदेखी बाहों ने हम सब को घेरा है,
ये पल उजाला है, बाकी अँधेरा है
ये पल गँवाना ना, ये पल ही तेरा है,
जीने वाले सोच ले
यही वक़्त है कर ले पूरी आरज़ू|

इस पल के जलवों ने महफ़िल सँवारी है
इस पल की गर्मी ने धड़कन उभारी है,
इस पल के होने से दुनिया हमारी है
ये पल जो देखो तो सदियों पे भारी है,
जीने वाले सोच ले
यही वक़्त है कर ले पूरी आरज़ू|

इस पल के साये में अपना ठिकाना है
इस पल के आगे की हर शय फ़साना है,
कल किसने देखा है, कल किसने जाना है
इस पल से पाएगा, जो तुझको पाना है,
जीने वाले सोच ले
यही वक़्त है कर ले पूरी आरज़ू|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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