फ़क़ीर को शाहों का डर नहीं होता!

हमारी आँख के आँसू की अपनी दुनिया है,
किसी फ़क़ीर को शाहों का डर नहीं होता|

वसीम बरेलवी

सदाओं का घर नहीं होता!

मुझे तलाश करोगे तो फिर न पाओगे,
मैं इक सदा हूँ सदाओं का घर नहीं होता|

वसीम बरेलवी

ख़ाक में मिलने का डर नहीं होता!

मैं उसकी आँख का आँसू न बन सका वर्ना,
मुझे भी ख़ाक में मिलने का डर नहीं होता|

वसीम बरेलवी

बातों से सर नहीं होता!

कभी लहू से भी तारीख़ लिखनी पड़ती है,
हर एक मारका बातों से सर नहीं होता|

वसीम बरेलवी

मुक़द्दर में घर नहीं होता!

सभी का धूप से बचने को सर नहीं होता,
हर आदमी के मुक़द्दर में घर नहीं होता|

वसीम बरेलवी

ख़ता हो, उसी को सज़ा मिले!

इस दौर ए मुंसिफ़ी में ज़रूरी नहीं ‘वसीम,
जिस शख्स की ख़ता हो, उसी को सज़ा मिले|

वसीम बरेलवी

कोई बेवफ़ा मिले!

रिश्तों को बार बार समझने की आरज़ू,
कहती है फिर मिले तो कोई बेवफ़ा मिले।

वसीम बरेलवी

किताबों में क्या मिले!

दुनिया को दूसरों की नज़र से न देखिये,
चेहरे न पढ़ सके तो किताबों में क्या मिले|

वसीम बरेलवी

हमारी तरफ देखता मिले!

इस आरज़ू ने और तमाशा बना दिया,
जो भी मिले हमारी तरफ देखता मिले|

वसीम बरेलवी

चाहता है उसे रास्ता मिले!

हर शख्स दौड़ता है यहां भीड़ की तरफ,
फिर यह भी चाहता है उसे रास्ता मिले|

वसीम बरेलवी