जो चाहते हैं समुंदर-कशी के साथ!

क़तरे वो कुछ भी पाएँ ये मुमकिन नहीं ‘वसीम’,
बढ़ना जो चाहते हैं समुंदर-कशी के साथ|

वसीम बरेलवी

बहुत दिन किसी के साथ!

दुनिया को बेवफ़ाई का इल्ज़ाम कौन दे,
अपनी ही निभ सकी न बहुत दिन किसी के साथ|

वसीम बरेलवी

गुज़ारी किसी के साथ!

किस काम की रही ये दिखावे की ज़िंदगी,
वादे किए किसी से गुज़ारी किसी के साथ|

वसीम बरेलवी

दुश्मनी भी नहीं थी किसी के साथ!

दुनिया मिरे ख़िलाफ़ खड़ी कैसे हो गई,
मेरी तो दुश्मनी भी नहीं थी किसी के साथ|

वसीम बरेलवी

चला हूँ किसी रौशनी के साथ!

तेरा ख़याल, तेरी तलब तेरी आरज़ू,
मैं उम्र भर चला हूँ किसी रौशनी के साथ|

वसीम बरेलवी

क़ुबूल मिरी हर कमी के साथ!

शर्तें लगाई जाती नहीं दोस्ती के साथ,
कीजे मुझे क़ुबूल मिरी हर कमी के साथ|

वसीम बरेलवी

मज़ाक़ हुआ रौशनी के साथ!

सब ने मिलाए हाथ यहाँ तीरगी के साथ,
कितना बड़ा मज़ाक़ हुआ रौशनी के साथ|

वसीम बरेलवी

ये देखिए कोई मुझे पहचाना भी!

जानने वालों की इस भीड़ से क्या होगा ‘वसीम’,
इसमें ये देखिए कोई मुझे पहचाना भी|

वसीम बरेलवी

समुंदर की तरफ़ जाना भी!

ख़ुद को पहचान के देखे तो ज़रा ये दरिया,
भूल जाएगा समुंदर की तरफ़ जाना भी|

वसीम बरेलवी

और तिरा कहलाना भी!

ऐसे रिश्ते का भरम रखना कोई खेल नहीं,
तेरा होना भी नहीं और तिरा कहलाना भी|

वसीम बरेलवी