बस्तियाँ यहाँ थीं बताओ किधर गईं!

दीवाना पूछता है ये लहरों से बार बार,
कुछ बस्तियाँ यहाँ थीं बताओ किधर गईं|

कैफ़ी आज़मी

लहरों से टकराती तो है!

इस नदी की धार से ठंडी हवा आती तो है,
नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है|

दुष्यंत कुमार

चाँदी जैसी लहरें गिरती!

जाने कितनी नदियों को धनवान बनाया झरनों ने,
चाँदी जैसी लहरें गिरती देखी हैं कोहसारों में।

नक़्श लायलपुरी