इक चराग़ कई आँधियों पे भारी है!

दुआ करो कि सलामत रहे मिरी हिम्मत,
ये इक चराग़ कई आँधियों पे भारी है|

वसीम बरेलवी

झोंकों के पीछे चल रही थीं आँधियाँ!

अब खुला झोंकों के पीछे चल रही थीं आँधियाँ,
अब जो मंज़र है वो पहले तो नज़र आया न था|

क़तील शिफ़ाई

कैसे जलता हुआ रह गया!

आंधियों के इरादे तो अच्छे ना थे,
ये दिया कैसे जलता हुआ रह गया|

वसीम बरेलवी