रूठ गए दिन बहार के!

वीराँ है मयकदा ख़ुमो-सागर उदास हैं,
तुम क्या गये कि रूठ गए दिन बहार के|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

पैमाना कि दिल है मेरा!

जाने क्या टूटा है पैमाना कि दिल है मेरा,
बिखरे-बिखरे हैं खयालात मुझे होश नहीं|

राहत इन्दौरी