शरमाये भी घबराये भी!

एक पगली मेरा नाम जो ले शरमाये भी घबराये भी,
गलियों गलियों मुझसे मिलने आये भी घबराये भी|

मोहसिन नक़वी

चंचल लड़की जैसी मां!

बांट के अपना चेहरा, माथा, आँखें जाने कहाँ गई|
फटे पुराने इक अलबम में, चंचल लड़की जैसी मां|

निदा फ़ाज़ली