एक मैं कि तेरे नाम से, ना-आशना आवारगी|

आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग-पोस्ट को दोहरा रहा हूँ| एक फिल्मी गाना याद आ रहा है, फिल्म थी- ’मैं नशे में हूँ’, यह गीत राज कपूर जी पर फिल्माया गया है, शैलेंद्र जी ने लिखा है, शंकर जयकिशन का संगीत और आवाज़ है मेरे प्रिय गायक मुकेश जी की। बोल हैं- हम हैं तो … Read more

बुनियाद हिलनी चाहिए!

स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की कुछ रचनाएं मैं पहले शेयर कर चुका हूँ| दुष्यंत कुमार जी हिन्दी के प्रमुख कवियों में शामिल थे, परंतु उनको विशेष रूप से प्रसिद्धि मिली थी आपातकाल में प्रकाशित उनकी विद्रोह के स्वर गुंजाने वाली ग़ज़लों से, जिन्हें बाद में उनके ग़ज़ल संकलन ‘साये में धूप’ में संकलित किया गया| … Read more

फिर-फिर वही सन्नाटा है!

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी अपने समय में हिन्दी के प्रमुख कवियों में शामिल थे तथा प्रतिष्ठित समाचार-पत्रिका ‘दिनमान’ के संपादक मण्डल में भी थे| सर्वेश्वर जी को साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए थे| आज मैं प्रस्तुत कर रहा हूँ सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की यह ग़ज़ल – अजनबी देश है यह, जी … Read more

तब भी तो तुम आए थे!

अली सरदार जाफरी साहब की एक नज़्म आज शेयर कर रहा हूँ| जाफरी साहब का नाम हिंदुस्तान के प्रसिद्ध शायरों में शामिल है और उनको भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था| लीजिए प्रस्तुत है अली सरदार जाफरी साहब की यह नज़्म- जब नहीं आए थे तुम, तब भी तो तुम आए थेआँख … Read more

सूरज रोज़ निकलता है!

आज फिर से एक बार मैं हिन्दी कवि सम्मेलनों में किसी समय गूंजने वाले एक अलग प्रकार के स्वर- स्वर्गीय शिशुपाल सिंह ‘निर्धन’ जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| ‘निर्धन’ जी की कवि सम्मेलनों में उपस्थिति एक चमत्कारी प्रभाव डालती थी| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय शिशुपाल सिंह ‘निर्धन’ जी का यह गीत- रात-रात … Read more

वसंत का एक दिन – रवींद्रनाथ ठाकुर

लीजिए आज फिर से प्रस्तुत है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट| आज मैं भारत के नोबल पुरस्कार कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। लीजिए पहले प्रस्तुत है मेरे … Read more

कब तक प्रतीक्षारत रहें!

आज काफी समय बाद मैं अपने एक अत्यंत प्रिय कवि स्वर्गीय किशन सरोज जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ, जिनका स्नेह पाने का भी अवसर मुझे मिला था| यह रचना कवि सम्मेलनी रचनाओं से बिल्कुल अलग है और सामान्य जन के सपनों और अभिलाषाओं की बात करती है, जिनको राजनीति सिर्फ छलावा देती … Read more

मेरी एक और कविता

आज फिर से पुराना लिखा हुआ याद आ रहा है, रचना ही कहूँगा इसे भी| जैसा याद आ रहा है, अपनी रचनाओं को शेयर करने के क्रम में इसे भी, जैसा है वैसा ही प्रस्तुत कर रहा हूँ- गीत जो लिखे गए, लिखे गए। किसी एक शर बिंधे, रंगे खग की आकुल चेष्टाओं की छाप,भोगीं … Read more

सौ वर्ष बाद!

आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य … Read more

खामोशी पहचाने कौन!

एक बार फिर से आज मैं अपने अत्यंत प्रिय शायरों में से एक, स्वर्गीय निदा फ़ाज़ली साहब का लिखा एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे जगजीत सिंह-चित्रा सिंह की सुरीली जोड़ी ने बहुत खूबसूरत अंदाज में गाया है| निदा फ़ाज़ली साहब ने कुछ बेमिसाल गीत, ग़ज़लें और दोहे लिखे हैं और यह भी उनमें … Read more

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