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बस एक निगाह प्यार की!

आज मोहम्मद रफी साहब का एक गाना शेयर कर रहा हूँ| रफी साहब ने हर तरह के गाने गाए हैं, और आज का गाना मस्ती से भरा हुआ है| वर्ष 1965 में रिलीज़ हुई फिल्म- मेरे सनम के लिए मजरूह सुल्तानपुरी साहब के लिखे इस गीत का संगीत दिया है ओ पी नैयर साहब ने|


लीजिए इस मस्ती भरे गीत का आनंद लीजिए-

पुकारता चला हूँ मैं
गली गली बहार की,
बस एक छाँव जुल्फ की
बस एक निगाह प्यार की|

ये दिल्लगी ये शोखियाँ सलाम की
यही तो बात हो रही है काम की,
कोई तो मुड़ के देख लेगा इस तरफ
कोई नज़र तो होगी मेरे नाम की|
पुकारता चला हूँ मैं…


सुनी मेरी सदा तो किस यकीन से
घटा उतर के आ गई ज़मीन पे,
रही यही लगन तो ऐ दिल-ए-जवां
असर भी हो रहेगा एक हसीन पे|
पुकारता चला हूँ मैं …


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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